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Charles Sobhraj: Black Warrant के मायावी जादूगर और औरतों के खूंखार Serial Killer की वो अनसुनी दास्तान जो आज भी सिहराती है

 Written By: Sudhanshu Chaurasia
 Published : Apr 01, 2026 02:54 pm IST,  Updated : Apr 01, 2026 02:55 pm IST

Charles Sobhraj: ‘बिकनी किलर’ (Bikini Killer) की रहस्यमयी जिंदगी और चालाकी की कहानी, जहां आकर्षण और अपराध का जादू एक साथ बुना गया। सलाखों के पीछे से फरारी और दुनिया भर में फैलते उसके रहस्य की दिलचस्प दास्तान।

तन्हा रातों में एक ऐसा साया, जिसकी आहट से दिल की धड़कनें रुक जाती थीं। उसकी मुस्कान में मासूमियत तो थी, लेकिन आंखों  में धोखे का समंदर छिपा था। कुछ उसे ‘सर्पेंट’ (Serpent) कहते, तो कुछ ‘जेल का जादूगर’। चार फिल्में, एक वेब सीरीज (Black Warrant) के बावजूद उसकी कहानी आज भी अनसुलझी है। दुनिया उसे ‘बिकनी किलर’ (Bikini Killer) भी कहती है। वह इंसान था या रहस्यमयी किताब, जिसके हर पन्ने पर नया अपराध लिखा हो? आइए, इस मायावी अपराधी की भूलभुलैया में कदम रखें।

चार्ल्स का बचपन

6 अप्रैल 1944 को वियतनाम के हो ची मिन्ह शहर में एक बच्चा जन्मा। भारतीय पिता और वियतनामी मां की संतान। माता-पिता की टूटी शादी और पिता का साथ छोड़ना, उसे कठोर दुनिया में धकेल गया। फ्रांस पहुंचकर बोर्डिंग स्कूल में उसका नाम लिखा गया हत्चंद भाओनानी गुरुमुख चार्ल्स शोभराज। उसको किताबों ने नहीं, चालाकी ने आकर्षित किया। छोटी चोरियां, ठगी और जालसाजी से उसने अपराध की दुनिया में पहला कदम रखा।

समंदर का मासूम शिकारी

1960 के अंत में पेरिस की सड़कों पर उसकी चालाकी निखरी। पासपोर्ट चुराना, फर्जी पहचान बनाना ये सब उसका अभ्यास था। फिर गोवा, थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के सुनहरे बीचों पर उसने अपना असली खेल शुरू किया, निशाना थीं विदेशी पर्यटक महिलाएं। आकर्षक व्यक्तित्व, सम्मोहक बातें और चमकती मुस्कान से वो पहली मुलाकात में ही उनका दिल जीत लेता। फिर दोस्ती, डिनर, ड्रिंक या डेजर्ट में नींद की गोली मिलाकर शिकार को बेहोश करके उसका सामान, पासपोर्ट और पैसे लूटकर हवा हो जाता। कई बार हत्या भी की। 15 से 20 हत्याओं का चार्ल्स पर आरोप लगा। उसकी सबसे करीबी साथी बनी फ्रेंच-कैनेडियन महिला मैरी लेक्लर्क, जो 1975 में भारत में उसकी ‘पत्नी’ बनी और अपराधों में पूरा साथ दिया।

तिहाड़ का बादशाह 

1972 में दिल्ली के अशोका होटल से ज्वेलरी चोरी के बाद सोभराज की पहली गिरफ्तारी हुई, पर वो अस्पताल से फरार हो गया। हालांकि, 1976 में वह फिर पकड़ा गया। तिहाड़ जेल में उसका रुतबा राजा जैसा था- स्टूडियो जैसी सेल, नौकर, मालिश, कपड़े धोना। सब उसे ‘चार्ल्स साहब’ कहते। सबसे हैरतअंगेज किस्सा था उसकी तिहाड़ जेल से फरारी का। जन्मदिन की पार्टी में उसने मिठाइयों में नशीली दवा मिलाकर सिपाहियों को बेहोश किया और 50 रुपये का लालच देकर 23 दिन आजाद रहा। गोवा में इंस्पेक्टर मधुकर झेंडे ने उसे पकड़ लिया।

तिलिस्म का अंत

1997 में रिहाई के बाद वह फ्रांस गया, लेकिन अपराध का कीड़ा उसे कहां ही चैन से बैठने देता। 2003 में वो काठमांडू में फिर पकड़ा गया। 1975 की दो हत्याओं के लिए 19 साल की सजा मिली। 2022 में उम्र के पड़ाव के कारण उसे रिहा कर फ्रांस भेज दिया गया। आज भी वो वहां साये की तरह जी रहा है। चार्ल्स शोभराज एक ऐसा किरदार बन गया, जिसके बारे में लोग आज भी सोचते हैं, क्या वह महज एक अपराधी था या एक ऐसा मायावी चेहरा जिसे समझ पाना आसान नहीं? यह कहानी सिर्फ एक इंसान की नहीं, बल्कि उस मानसिकता की है, जहां आकर्षण के पीछे छिपा होता है खतरा। यह हमें सिखाती है कि हर चमकती चीज भरोसे के काबिल नहीं होती।

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